गुरुवार, 14 अगस्त 2014

स्वतंत्रता दिवस


मन स्वतंत्र तन स्वतंत्र आज स्वतंत्रता दिवस है |
भारत का राष्ट्रीय पर्व है ,शहीदों की शहादत पर हम सबको गर्व है |
आज के ही दिन अर्ध रात्रि के बाद लाल किले पर नेहरू जी ने झंडा फहराया था |
देश वासियों को स्वतंत्रता की घोषणा कर आने वाली समस्याओं से अगाह कराया था |
विभाजन का दंश सबने भोगा झेला व सहलाया था |
भाई से भाई बिछुड़गया था किसी को कुछ भी सूझ न पाया था |
ऐसी स्वतंत्रता पाकर भी भारत कुछ कर नहीं पाया था |
यह तो नेताओं का था षड्यंत्र ,डूब गया था स्वतंत्र शासन तंत्र |
जनता को दिया जा रहा था शांति व अमन का मन्त्र |
वे कर नहीं पा रहे थे दीन दुखियों के दुःख दूर करने का यंत्र |
फिर भी भारतीयों ने वह कठिन समय भी किसी तरह गुजारा |
विस्थापितों ने उस परस्थिति में भी अपना जीवन नए सिरे से संवारा |
की गई थी शरणार्थियों की शासन की ओर से पूरी मदद |
पहुंचाई जा रही थी विस्थापितों यथा समय सरकारी रसद |
बड़े ही दुःखी व संतप्त थे वे लोग जो करते थे पाकिस्तान में सुखों का भोग |
वे उस समय दाने -दाने को हो रहे थे मोहताज |
पर घूम रहे थे सिर पर रख कर नई-नई स्वतंत्रता का ताज
कैसा था वह स्वतंत्रता देवी का आलम ,उन्हें नहीं मिल पा रहा था सालन |
जगह -जगह    दिखाना पड़ता था उनको चालान |
उनका जीना नहीं था यहाँ आसान |
कैसी भगवन की लीला थी |
झेल रही दुःख अपनी ही शीला रोज़ी व् सलमा थी |
हम सबने स्वतंत्र भारत की परिस्थितियां झेली |
फिर भरने लगे बड़े बड़े नेता अपनी अपनी झोली |
शरणार्थी तो कड़ी मेहनत करके बन गए है वैसे के वैसे |
पर मूल निवासी आज भी रह गए है जैसे के तैसे |
स्वतंत्रता की सड़सठवी शताब्दी मनाकर भी वे आज भी है मोहताज |
शहीदों के बच्चे बेकारी बेरोजगारी से है ज़ार ज़ार |
भले ही देश स्वतंत्रता से है आज आगाज़ |
आध्यात्मिक ज्ञान से बन गया है दुनिया का सरताज |
पर गरीबी आज भी दे रही है हमको आवाज़ |
कर दो स्वतंत्र भारत में हमारा भी उद्धार |
आओ शहीदो को याद करें उनकी कुर्बानियों से लोगो को आगाह करें |
जन मानस में स्फूर्ति का संचार करें |

स्वतंत्रता देवी को नतमस्तक होकर प्रणाम करें |

2 टिप्‍पणियां :

  1. भले ही देश स्वतंत्रता से है आज आगाज़ |
    आध्यात्मिक ज्ञान से बन गया है दुनिया का सरताज |
    पर गरीबी आज भी दे रही है हमको आवाज़ |
    कर दो स्वतंत्र भारत में हमारा भी उद्धार |
    ​67 साल से लालकिले से हमेशा यही आवाज़ आती रही है की हम गरीबी मिटा देंगे लेकिन न गरीबी हटी और न गरीब कम हुए ! हाँ , गरीबी को मापने के आंकड़े जरूर बदल जाते हैं ! सही और सार्थक शब्द

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  2. पर गरीबी आज भी दे रही है हमको आवाज़ |
    कर दो स्वतंत्र भारत में हमारा भी उद्धार |
    you are right Yogi ....

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